वो बेवफा हमारा इम्तेहा क्या लेगी, मिलेगी नज़रो से नज़रे तो अपनी नज़रे ज़ुका लेगी, उसे मेरी कबर पर दीया मत जलाने देना, वो नादान है यारो.. अपना हाथ जला लेगी।
आज हम उनको बेवफा बताकर आए है, उनके खतो को पानी में बहाकर आए है, कोई निकाल न ले उन्हें पानी से.. इस लिए पानी में भी आग लगा कर आए है।
प्यार करने का हुनर हमें नहीं आता, इसलिए प्यार की बाज़ी हम हार गए, हमारी ज़िन्दगी से उन्हें बहुत प्यार था, सायद इसलिए हमे ज़िंदा ही मार गए!
वो दिल ही क्या.. तेरे मिलने की.. जो दुआ न करे.. मैं तुझ को.. भूल के.. ज़िंदा रहूँ.. ख़ुदा न करे
वो हुस्न ही क्या जो बिक जाये बाजारो में, इश्क के साज पर बाजार बिका करते है। ऐक आदत सी पड गयी है खरीदने की हमें, ओर भी कुछ है जहाँ ताज भुका करते है।।
Meri chahte tumse alag kb h dil ki bate tumse chupi kb h tum sath rho dil me dhadkan ki jgah fir jindgi ko sanso ki jarurt kb h
कोई आँखों में रहती है तो कोई बांहें बदलती है, मुहब्बत भी सियासत की तरह राहें बदलती है...
लाओ, वो गिरवी रखी मेरी नींदे वापस कर दो, महोब्बत नहीं दे सकते तो कीमत क्यूँ वसूलते हो
ज़माने के तो गम सुलझा रहा हूँ, मगर मैं खुद उलझते जा रहा हूँ ! ये दुनियां कब किसी को मानती हैं, मैं अपने आप को मनवा रहा हूँ !! ये क्या दिन आ गए हैं जिंदगी में, मैं अपने आप से ऊबता रहा हूँ ! ओ धोका दे तो उसकी क्या खता हैं, खता मेरी हैं के धोका खा रहा हूँ !!!
अपनी मरजी से कहाँ अपने सफर के हम हैं! रुख हवाओं का जिधर का हैं उधर के हम हैं !! चलते रहते हैं कि चलना हैं मुशाफिर का नसीब ! सोचते रहते हैं किस राहे गुजर के हम हैं !! वक़्त के साथ हैं मिट्टी का सफर सदियो से ! किसको मालूम हैं कहाँ के हैं किधर के हम हैं !!!
मेरी दुल्हन सी रातों को, नौलाख सितारों ने लूटा ! नींदें तो लूटीं रूपयों ने, सपना झंकारों ने लूटा !! ससुराल चली जब डोली तो, बारात दुआरे तक आई ! नैहर को लौटी डोली तो, बेदर्द कहारों ने लूटा !!
कश्ती है पुरानी मगर दरिया बदल गया, मेरी तलाश का भी तो ज़रिया बदल गया! ना शक्ल ही बदली न ही बदला मेरा किरदार, बस लोगों के देखने का नज़रिया बदल गया! हम जिस दीए के दम पर बग़ावत पर उतर आए, सोहबत के अँधेरे में वो दीया बदल गया! ईमान अदब इल्म हया कुछ भी नही क़ायम, मत पूछिए इस दौर में क्या-क्या बदल गया!!!
किसी के दिल को चोट पहुचाकर, माफ़ी मांगना बहुत ही आसान है, लेकिन खुद चोट खाकर, दूसरों को माफ़ करना बहुत मुशकिल है!
रोक देना मेरी मैय्यत को उसके घर के सामने ! लोग पूछे तो कह देना की कनधे बदल रहे है !!
तुम जलाकर दिये, मुँह छुपाते रहे, चाँद घूँघट घटा का उठाता रहा ! तुम न आए, हमें ही बुलाना पड़ा, मंदिरों में सुबह-शाम जाना पड़ा !! लाख बातें कहीं मूर्तियाँ चुप रहीं, बस तुम्हारे लिए सर झुकाता रहा ! दुख यही है हमें तुम रहे सामने, पर दिया प्यार का, काँपता रह गया !!
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