Dard Bhari Shayari

ज़ख़्म इतने गहरे हैं इज़हार क्या करें, हम खुद निशाना बन गए वार क्या करें, मर गए हम मगर खुली रही ये आँखें, इससे ज्यादा उनका इंतज़ार क्या करें।

ख़ामोश फ़िजा थी कोई साया न था, इस शहर में मुझसा कोई आया न था, किसी ने छीन ली हम से वो खुशी.. हमने तो किसी का दिल दुखाया न था.

पत्थरों को खुश करने के लिए फूलो का कत्ल कर आए हम । जहा आए थे अपने पाप मिटाने वहां एक और पाप कर आए हम ।

आशु आ जाते है रोने से पहले । ख्वाब टूट जाते है सोने से पहले। लोग कहते है मोहब्बत गुनाह है, काश कोई रोक लेता यह गुनाह होने से पहले।

अंदर ही अंदर मेरे दोस्त को फिक्र खाए जा रहा है, वो टूट कर भी अपनी मोहब्बत को चाह रहा हैं....✍️ ~~भाई का छोटा भाई~

पता चला है सिगरेट का नशा करता है, यार मेरा दूसरी दुकान में जाकर वफा करता है , सिगरेट छुप छुप के पीने वाले वे दिन चले गए , मेरा दोस्त अब सबके सामने नशा करता है....✍️ ~~भाई का छोटा भाई~

जो टूट कर भी मुस्कुरा दे , वो बेशर्म हूं मैं....✍️ ~~भाई का छोटा भाई~

इस ज़िन्दगी में कितनी घुटन हो रही हैं , ये जिंदिगी अब हम से न सहन हो रही है...✍️ ~~भाई का छोटा भाई~

सिगरेट मेरा यारा एक तू ही तो है सहारा , जिस दिन घर छोड़ कर आया था , उस दिन मुझे कोई नहीं रोक पाया था , सिगरेट उस दिन तूने ही तो मुझे सम्भाला था , एक हाथ मे सिगरेट तो दूसरे हाथ में प्याला था , जब हाथ में लिया प्याला तो मेरी जिंदगी शर्मिंदगी थी , पर क्या करें उस टाइम पर घर की यादें जिंदा थी, प्याला की एक ही मारी थी घूंट , और घर की गई सारी यादें गई छूट , अरे सिगरेट तेरे एहसान को मै कैसे भूल जाऊं , तुझे तो मैं अंतिम दम तक अपने मुंह से लगाऊ, अरे कहने दे दुनिया को जो कहती है , दुनिया कहां दूसरों के दर्द को समझती हैं , उन्हें क्या पता कि दर्द में किसने साथ निभाया था , एक सिगरेट के कारण ही तो मैं बच पाया था , सिगरेट ने निभाई क्या यारी है , जिंदगी से ज्यादा मुझे सिगरेट प्यारी है , अगर सिगरेट ना होती गम भरी जिंदगी में दम घुट जाता , और सच कहूं तो मै ऐसे ही मर जाता , अपने गम को जब मै सह लेता हूं , मै भाई का छोटा भाई अपने गमों को अल्फाज देता हू....✍ by bhai Ka Chhota bhai

फिर वही ज़िन्दगी वही बात होगी, नए साल की एक नई शुरुआत होगी...✍️ ~~भाई का छोटा भाई~

सपनो को हकीकत बनाने में, हम कितने खर्च हो गए कमाने में....✍️ ~~भाई का छोटा भाई~

साहब रात में फोन जमा कर लेते हो मैं अल्फ़ाज सिऊगा कैसे , आपको तो पता है साहब मोबाइल शरीर का अंग गया है उसके बिना मै जिऊगा कैसे..... ✍️ ~~भाई का छोटा भाई~

मुझे मनाओ मत मेरी बात समझो , मैं नाराज़ नहीं हूँ परेशान हूँ इन दिनों...✍️ ~~भाई का छोटा भाई~