इंतज़ार की आरज़ू अब खो गयी है, खामोशियो की आदत हो गयी है, न सीकवा रहा न शिकायत किसी से, अगर है तो एक मोहब्बत, जो इन तन्हाइयों से हो गई है......!!!
अपनो को दूर होते देखा, सपनो को चूर होते देखा, अरे लोग कहते हैँ की फूल कभी रोते नही, हमने फूलोँ को भी तन्हाइयोँ मे रोते देखा......!!!
बेआबरू होके महेफिल से निकल गये हम, किसी और की आबरू की खातिर…..!!!
नसीबों के खेल भी अजीब होते हैं, प्यार में आंसू ही नसीब होते हैं, कौन होना चाहता हे अपनों से जुदा, पर अक्सर बिछड़ते हैं वो जो करीब होते हैं......!!!
ना तस्वीर है उसकी जो दिदार किया जाऐ, ना पास है वो जो उससे प्यार किया जाऐ, ये कैसा दर्द दिया उस बेदर्द ने, ना उससे कुछ कहा जाऐ... ना उसके बिन रहा जाऐ.....!!!
मोती हूँ तो दामन में पिरो लो मुझे अपने, आँसू हूँ तो पलकों से गिरा क्यूँ नहीं देते, साया हूँ तो साथ ना रखने कि वज़ह क्या, पत्थर हूँ तो रास्ते से हटा क्यूँ नहीं देते.......!!!
याद नही करोगे तो भुला भी ना सकोगे, मेरा ख्याल ज़ेहन से मिटा भी ना सकोगे, एक बार जो तुम मेरे गम से मिलोगे, तो सारी उमर मुस्कुरा ना सकोगे.......!!!
वो रोए तो बहुत, पर मुझसे मूह मोड़ कर रोए, कोई मजबूरी होगी तो दिल तोड़ कर रोए, मेरे सामने कर दिए मेरे तस्वीर के टुकड़े, पता चला मेरे पीछे वो उन्हे जोड़ कर रोए......!!!
कुछ इस तरह से वफ़ा की मिसाल देता हु, सवाल करता है कोई तो टाल देता हु, उसी से खाता हूँ अक्सर फरेब मंजिल का, मैं जिसके पाँव से काँटा निकाल देता हु…...!!!
कभी जिंदगी में किसी के लिये मत रोना, क्योंकि वो तुम्हारे आँसुओं के क़ाबिल ना होगा, और जो इन आँसुओं के क़ाबिल होगा, वह तुम्हें रोने ही नहीं देगा....!!!
साँचे में किसी और की मुहब्बत के हमने, खुद को कभी ढलने नहीं दिया, आँखों को आज भी तेरा इन्तजार है कि गुलाल किसी को मलने नहीं दिया....!!!
पलकों में आँसु और दिल में दर्द सोया है, हँसने वालो को क्या पता, रोने वाला किस कदर रोया है, ये तो बस वही जान सकता है मेरी तनहाई का आलम, जिसने जिन्दगी में किसी को पाने से पहले खोया है........!!!
अपनी तो ज़िन्दगी है अजीब कहानी है, जिस चीज़ को चाह है वो ही बेगानी है, हँसते भी है तो दुनिया को हँसाने के लिए, वरना दुनिया डूब जाये इन आखों में इतना पानी है.....!!!
चिराग से न पूछो बाकि तेल कितना है, सांसो से न पूछो बाकि खेल कितना है, पूछो उस कफ़न में लिपटे मुर्दे से, जिन्दगी में गम और कफ़न में चैन कितना है.....!!!
पत्थरों से प्यार किया नादान थे हम, गलती हुई क्योकि इंशान थे हम, आज जिन्हें नज़रें मिलाने में तकलीफ होती हैं, कभी उसी शख्स की जान थे हम…..!!!
Siddh is offline
Murtaza is offline
Lalit is offline
Arielfek is offline
bhammar is offline
Sarmista is offline
kush is offline
vinod is offline
Irfan is offline
Mayank is offline
Rahul is offline
Ruby is offline
ABJAL is offline
Abhishek is offline
Bholeshankar is offline
Please Login or Sign Up to write your book.