सफर ज़िन्दगी का तन्हा तन्हा है
चारों तरफ मेला ही मेला है
इतनी सारी भीड़ मै भी
इंसान अकेला अकेला है
फ़कीर बादशाह साब (FAKEERA)
Words for every feeling
Share your writing ↗Latest Shayari
A little shayari, a little reflection. Read words shared from the heart.
फ़कीर ज़िद पर
आ जाए तो
उखाड़ कर फेंक देता है
तख्त शहंशाहों का
फ़कीर बादशाह साब ( FAKEERA)
जितने भी हर्फ है
सब से ज़्यादा तासीर
अलिफ़ में है
या अल्लाह तेरा नाम
लेनेवाला हर एक बंदा
तकलीफ में है
फ़कीर बादशाह साब (FAKEERA)
क्या हासिल गर साब कुछ खोकर
जंग जीतेगे
ज़ख्म तो भर जायेगे मगर दाग नहीं
मितेगे
फ़कीर बादशाह साब (FAKEERA)
पल पल को बदलता है रंग
गिरगिट की तरह वक़्त
ये जिसके हाथों से निकल जाए
फ़िर उसका ना ताज रहे ना तख्त
ओ वक़्त हाय वक़्त तू कहां कहां
पहोंच गया बे वक़्त
फ़कीर बादशाह साब ( FAKEERA)
जिन कविता गीत ग़ज़ल शेर
नज़्म दोहे वगैरा वगैरा का मतलब
आम आदमी को समझाना पड़ जाए
अय सी किताबों को फ़ाड़ कर कचरे
के डिब्बों में फेक देना चाहिए
फ़कीर बादशाह साब ( FAKEERA)
Mat Dekho Is Chere Ko
Mat Dekho Is Chere Ko
Yeha Hasi Jarur Dekhegi
Jo Dard DIL Mein Hai
Na
Usko Chupane K Liye Hasna Parta Hai
#SAGAR_R
#BOXER?✍️
कबीरा गरीबन तक नहीं पहुंच पाए
आप के विचार आप के दोहे
बस अमीरन ही गाये अमीरन ही सुने
अमीरन ही समझे आप के दोहे
फ़कीर बादशाह साब ( FAKEERA)
मै ज़िन्दगी से ज़िन्दगी मुझसे
बेज़ार हो गई है
मेरा जिस्म नहीं
मेरी रूह बीमार हो गई है
फ़कीर बादशाह साब ( FAKEERA)
ज़िन्दगी ने ज़िन्दगी भर
ज़िन्दगी को उलझा दिया
मौत आयी मौत ने ज़िन्दगी की
हर उलझन को सुलझा दिया
फ़कीर बादशाह साब ( FAKEERA)
उड़ उड़ के कितना उड़ेगा अय आदमी
तेरी उड़ान भी तो एक हद मै है
चलते चलते कभी भी कहीं भी रुक जाती है
ज़िन्दगी भी तो मौत की ज़द में है
फ़कीर बादशाह साब ( FAKEERA)
अय ज़िंदगी तेरे चेहरे पर
एक मुस्कान की खातिर
बहोत आंसू बहाए है
मेरी आंखों ने
फ़कीर बादशाह साब (FAKEERA)
खौईशे बे सबर सी है
दुआयें बे असर सी है
हर पल की फिकर सी है
ज़िन्दगी मुक्तसर सी है
फ़कीर बादशाह साब ( FAKEERA)
मेरे आज़ाद जिस्म को
क़ैद ए रूह मत देना
बड़ी मुश्किल से काटी है
साजा ए ज़िन्दगी मैंने
फ़कीर बादशाह साब (FAKEERA)
मै ज़िन्दगी से ज़िन्दगी भर लड़ा
ज़िन्दगी को ज़िन्दगी से जीता ने के लिए
पर ज़िन्दगी तो ज़िन्दगी से हार ही गई
एसी आंधी चली मेरी ज़िंदगी में
के मेरी ज़िन्दगी से मेरे ज़िन्दगी की
बहार ही गई
ज़िन्दगी तो ज़िन्दगी से हार ही गई
फ़कीर बादशाह साब ( FAKEERA)
Your voice belongs here.
Share a thought, a poem or a story with the community.
Start writing ↗