जब” से “वो” हमें “जगा” गए “हम” “उम्र” भर “सो” न सके, “जाने” क्या “कशिश” थी उनमे, “किसी” और को “हम” “अपना” “बना” न सके…!!
दिल मे छूपा रखी है मोहब्बत काले धन की तरह, खुलासा नही करता हूँ कि कही हंगामा ना हो जाये.
तराशा है उनको बड़ी फुर्सत से, जुल्फे जो उनकी बादल की याद दिला दे, नज़र भर देख ले जो वोह किसी को, नेकदिल इंसान की भी नियत बिगड़ जाए.
कभी सभले तो कभी बिखर गए हम, अब तो खुद में ही सिमट गए हम, यूँ तो ज़माना खरीद नहीं सकता हमें, मगर प्यार के दो लफ्जों से बिक गए हम।
रुठ जाओ कितना भी मना लेंगे, दूर जाओ कितना भी बुला लेंगे. ..दिल आखिर दिल है सागर का रेत तो नहीं, की नाम लिख कर मिटा देंगे!!
यूं ना देखा करो मेरी आंखों में आंखें डाल कर, तेरी आंखों के समंदर में मेरी दिल की नाव डोल जाती हैं!!
होठ पे लाली नाक में बाली वो नजरबंद जैसी है, बस उसका नूर देख के बता दो यारो, मेरी पसंद कैसी है!!
कसा हुआ है तिर हुस्न का, जरा संभाल के रहिएगा.. नजर नजर को मारेगी तो कातिल हमें ना कहिएगा!!
ऊपर वाले ने होठ धनुष जैसे बनाए हैं, यहीं से वो शब्द रूपी बाण चलते हैं, जो दिल को छू भी लेते हैं, और दिल को चिर भी देते है!!
दुनिया में ऐसा कोई पुरुष नहीं है, जो कोई एक ही महिला से आकर्षित होता हो!
चेहरे पे मेरे जुल्फों को फैलाओ किसी दिन, क्यूँ रोज गरजते हो बरस जाओ किसी दिन, खुशबु की तरह गुजरो मेरी दिल की गली से, फूलों की तरह मुझपे बिखर जाओ किसी दिन।
छुपाना चाहता हूँ तुम्हे अपनी आग़ोश में इस क़दर, कि हवा भी गुज़रने की इज़ाजत माँगे, हो जाऊँ मैं मदहोश तुम्हारे इश्क़ में इस क़दर, कि होश भी आने की इज़ाजत माँगे।
चलो अपनी चाहतें नीलाम करते हैं, मोहब्बत का सौदा सरे आम करते है, तुम अपना साथ हमारे नाम कर दो, हम अपनी ज़िन्दगी तुम्हारे नाम करते हैं..!
लगाके इश्क़ की बाजी सुना है दिल दे बैठे हो, मुहब्बत मार डालेगी अभी तुम फूल जैसे हो।
कभी-कभी तुम भी कुछ कह लिया करो, एकतरफा सुनवाई तो अदालत में भी नहीं होती!!
Rahul is offline
Ramlakhan is offline
Ashutosh kumar is offline
sudhir is offline
Jamesmut is offline
Ranu is offline
Donna is offline
Sonu is offline
Aditya is offline
vishnu is offline
Sara is offline
Rakesh is offline
Amrita is offline
Gudu is offline
manibhusan is offline
Please Login or Sign Up to write your book.