तुम्हारी ज़ुल्फ़ों के साये में शाम कर लूंगा, सफर इस उम्र का पल में तमाम कर लूंगा।
आपसे रोज़ मिलने को दिल चाहता है, कुछ सुनने सुनाने को दिल चाहता है, था आपके मनाने का अंदाज़ ऐसा, कि फिर रूठ जाने को दिल चाहता है।
बहके बहके ही अंदाज-ए-बयां होते हैं, आप जब होते हैं तो होश कहाँ होते हैं।
अदा से देख लो जाता रहे गिला दिल का, बस इक निगाह पे ठहरा है फ़ैसला दिल का।
जो तेरे गुलाबी लब मेरे लबों को छू जायें, मेरी रूह का मिलन तेरी रूह से हो जाये, ज़माने की साज़िशों से बेपरवाह हो जायें, मेरे ख्वाब कुछ देर तेरी बाहों में सो जायें, मिटा कर फ़ासले हम प्यार में खो जायें, आ कुछ पल के लिये एक-दूजे के हो जायें।
तेरे हर गम को अपनी रूह में उतार लूँ, ज़िन्दगी अपनी तेरी चाहत में संवार लूँ, मुलाकात हो तुझसे कुछ इस तरह मेरी, सारी उम्र बस एक मुलाकात में गुज़ार लूँ।
चाहा है तुम्हें अपने अरमान से भी ज्यादा, लगती हो हसीन तुम मुस्कान से भी ज्यादा, मेरी हर धड़कन हर साँस है तुम्हारे लिए, क्या माँगोगे जान मेरी जान से भी ज्यादा।
जिस नगर भी जाओ किस्से हैं कमबख्त दिल के, कोई ले के रो रहा है कोई दे के रो रहा है।
?: जी तो चाहता है हर इक उलझन पर इक चोट रख दूँ तेरी ज़ुल्फ़ें हटाऊँ और तेरी गर्दन पर अपने होंठ रख दूँ?
प्यार की कोई हद समझना, मेरे बस की बात नहीं, दिल की बातों को न करना, मेरे बस की बात नहीं, कुछ तो बात है तुझमें तब तो दिल ये तुमपे मरता है, वरना यूँ ही जान गँवाना, मेरे बस की बात नहीं|
Aftab is offline
Harolduselm is offline
Sweta is offline
Mohd is offline
deep is offline
Shambhu is offline
Kaushik is offline
purnaraj is offline
PiPiche is offline
manoj is offline
Dilman is offline
vikash is offline
Dinesh kumar is offline
Mohd. is offline
Ravi is offline
Please Login or Sign Up to write your book.