सोच समझकर खोला करो राज अपने दिल के, खुद के सिवा कोई हमदर्द नहीं होता...
नजरें तुम्हें देखना चाहे तो आंखों का क्या कसूर, हर पल याद तुम्हारी आए तो सांसो का क्या कसूर, वैसे तो सपने पूछ कर नहीं आते, पर सपने तेरी ही आए तो हमारा क्या कसूर!!
अहसास लिखूंँ जज्बात लिखूंँ या तेरी शोख अदाओं का अंदाज लिखूंँ, मेरे जहन में वो लफ्ज़ कहाँ कि तेरे हुस्न की तमाम बात लिखूँ!!
रूह को चाहने वाले अब तो शायर हो गए, जिस्मों को चाह रखने वाले आशिकी में माहिर हो गए!!
इन होठों पे वही ख्वाहिश है, दिल में भी वही अफ़साने हैं, तू अब भी मदहोश गजल है, हम आज भी तेरे दीवाने हैं!!
शदीद प्यास थी, फिर भी न छुआ पानी को, मैं देखता रहा दरियाँ, उसकी रवानी को!!
जरूरत से ज्यादा आराम, और हद से ज्यादा प्रेम, इंसान को अपाहिज बना देता है!!
जीवन नर्क बना हुआ है, क्योंकि हम सब प्रेम चाहते हैं, प्रेम देना कोई नहीं चाहता!
मीठे बोल बोलिए क्योंकि अल्फाजों में जान होती है, इन्हीं से आरती, अरदास, अजान, होती है, ये दिल के समंदर के वो मोती है "दोस्तों" जिनसे इंसान की पहचान होती है!!
चाहे जितनी रहूँ मशरूफ जितने हो काम.... मन के किसी कोने में गूंजता है तेरा नाम....!!
माना कि बड़ा खूबसूरत हुस्न है तेरा, लेकिन दिल भी होता तो क्या बात होती.....
हजारो मेहफिल है लाखो मेले है, पर जहा तुम नहीं वाह हम अकेले है
धारा 307 लगनी चाहिए तेरी निगाहों पर, यूँ देखना भी क़त्ल की कोशिश में शुमार होती है!!
दर्द मिला है इश्क में इतना की दिल टूट गया है मेरा! ख्वाब बिखर गए फिर भी हर जख्मो से हम निखर गए हैं!!
मोहब्बत तो करते थे तुम, वरना क्यों खींचे चले आते हम! थोड़ा सा संभाल लेते तो, टूटने से ना सही पर बिखरने से तो बच जाते हम!!
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