खाली से दिल में तेरी वो हंसी
आज भी दिल की दीवारों को हिला देती है
हर दिन तुझसे दूर भागते है
कम्बख्त ये राते हर बार तेरी याद से मिला देती है
Words for every feeling
Share your writing ↗Best Quotes in Hindi
A little shayari, a little reflection. Read words shared from the heart.
School से लेकर hospital तक सबको privata पसंद है बस लड़का सरकारी नौकरी वाला चाहिए
.लुट लेना या लुट जाना। ...... यही तो पहचान है......... कौन देखता है मुहब्बत में नफ़ा है की नुक़सान है........

ज़ख़्म झेले दाग़ भी खाए बहुत
दिल लगा कर हम तो पछताए बहुत!!
लड़की अपने ब्वॉयफ्रेंड को अपनी मम्मी से
मिलवाने ले गई...!
दूसरे दिन...
गर्लफ्रेंड - मेरी मम्मी को तुम बहुत पसंद आए...!
ब्वॉयफ्रेंड - चल पगली....कुछ भी हो,
मैं शादी तो तुमसे ही करूंगा...!
मम्मी से बोलना मुझे भूल जाएं...!

वाह रे इंसान ,
मुझे तो इंसान कहने में शर्म आती है ,
दुष्कर्म करने वाले दरिंदों की मौत क्यों नहीं हो जाती हैं ,
क्यों इनको दिखती नहीं मां बहन बेटियां ,
आखिर इनके घर कौन पकाता है रोटिया ,
वाह रे इंसान ,
मुझे तो इंसान कहने में शर्म आती है ,
आखिर इन निलज्जो कि शर्म कहां जाती है ,
इंसानियत तो रही नहीं इंसान में,
इंसान ही तुले हैं दूसरे इंसान की जान में,
वाह रे इंसान ,
मुझे तो इंसान कहने में शर्म आती है ,
आखिर इन बलात्कारियों को फांसी क्यों नहीं हो जाती हैं,
क्यों नहीं बनाते हो नए कड़े कानून ,
दुष्कर्मीयों का सीधे कर दो खून, वाह रे इंसान ,
मुझे तो इंसान कहने में शर्म आती है ,
पर पता नहीं बलात्कारियों को अपनी मां बहन क्यो ध्यान नहीं आती हैं ,
इनको ऐसी मौत दो कि ,
दुष्कर्म करने की सोचने से पहले ही डर जाएं ,
बलात्कारी यही सोचे कि दुष्कर्म करने से अच्छा है मर जाए ,
वाह रे इंसान ,
ऐसे इंसान को लिखने में मेरी कलम शर्माई,
अब इन दरिंदों को क्या लिखूं मैं भाई का छोटा भाई...✍…
आज मैं लिखुंगा ,
अपनी जिंदगी की कहानी !
कत्ल कैसे हुआ मेरा ,
और बर्बाद हुई रूवानी !
मैं खेलता था अल्फाजों से ,
किसी ने मेरे दर्द कि बना दि कहानी !
शोले जलते दिल में ,
और बची थी जावानी !
थोड़ा रूको साहब मैं बताऊगा ,
अपने उबलते रक्त की कहानी ।
यह बात तब की है ,
जब शुरू हुई थी मेरी जवानी !
मैं अकेला बहुत था जिंदगी में ,
और लिखना चाहता था अपनी कहानी !
जिल्लत भरी जिंदगी थी मेरी ,
और रुसवाई की तन्हाई !
टुकड़ों में जब बटा खुद को,
सबने की सराहनी !
अल्फाज मेरे नोच खा गए गिद्ध ,
अब क्या बताऊ अपनी कहानी !
मजे लेते लोग सभी ,
हँसती भीड़ की कहानी !
पर कामयाब तभी होंगा ,
जब बदल लू वक्त अपना !
फिर मैं लिखुंगा ,
अपने बदलते वक्त की कहानी !
भाई का छोटा भाई की ,
दुनिया होगी दिवानी !
फिलहाल मैं शून्य हूँ....
जल्द ही लिखुंगा ,
अपने अनंत की कहानी !
फिलहाल मैं शून्य हूँ....
जल्द ही लिखुंगा,
अपने अनंत की कहानी...✍️
~भाई का छोटा भाई
मत भिड़ना मेरे दोस्तों से कहीं शहर में ,
नहीं दुनिया तुम्हारी लाश पाएगी नहर में ,
मैं ना रहूं तो कोई असर नहीं पड़ता ,
मेरे दोस्तों को कोई फरक नहीं पड़ता ,
सच कहूं तो आज भी मेरे दोस्त रखते हैं मुझे दिल में ,
तभी तो जब शहर जाता हूं तो दुश्मन छुप जाते हैं बिल में ,
आज भी अपना बहुत कहर हैं ,
भूल गए क्या तुम रीवा अपना पुराना शहर है ,
मत भिडना मेरे दोस्तों से वो ऐसे छोड़ते नहीं ,
जब तक ढंग की हड्डियां तोड़ते नहीं ,
कहीं हाथ कहीं पैर कहीं घुटना मोड़ देते हैं ,
जब दुश्मन की जान निकल जाती है तो छोड़ देते हैं ,
सच कह रहा हूँ मत भिडना मेरे दोस्तों से कही शहर में ,
नही दुनिया तुम्हारी लाश पाई नहर में ,
वो जिंदगी जीते है अपने रूल से ,
किसी बेगुनाह को नहीं मारते भूल से,
वो दुश्मन से मिलते हैं अनजान से ,
फिर उसे मार देते हैं जान से ,
मत भिडना मेरे दोस्तों से कही शहर में ,
नही दुनिया तुम्हारी लाश पाई नहर में ,
मेरे दोस्तों के अंदर कोई नहीं है दया ,
मार मार के सब कुछ करा लेत…
दिल को संभालने का कोई और तरीका निकाला जाए l
लूटते हैं जो चैन औरों का,,,,
कभी उनके घर भी डाका डाला जाए ll
खुश तो था मगर इस साल नही ,
चुप रहो अब कोई सवाल नही ,
तुम होते तो दुनिया जीतता मैं ,
तुम मेरे उरूज थे जवाल नही ,
खुश तो था मगर इस साल नही ,
गिरा हूँ मैं तो उठ भी जाऊँगा ,
अजनबी मुझको तू संभाल नही ,
तुम्हे आसांन लगता है बिखरना ,
मेरे जैसा तुम्हारा हाल नही ,
खुश तो था मगर इस साल नही ,
तुम्हारी खुशियां जरूरी हैं यार ,
मैं जख्म लेकर ही ठीक हूं ,
मुझे गम का कोई मलाल नही ,
खुश तो था मगर इस साल नही ,
मैं बंदा गलत हूं सोचता भी गलत हू ,
पर कभी खुद से करता सवाल नही,
खुश तो था मगर इस साल नही ,
अपनों के चक्कर में अपने को ही खो दिए ,
जैसे कोरोना महामारी में हर कोई रो दिए,
अब कैसे कहूं कि जिंदगी में बवाल नहीं ,
खुश तो था मगर इस साल नही ,
जख्म देते हो कहते हो सीते रहो ,
जान लेकर कहोगे कि जीते रहो ,
मैं भाई का छोटा भाई अपना जज्बात लिख रहा हूं ,
पर उस पर कोई सवाल नहीं ,
खुश तो था मगर इस साल नही ,
खैर छोड़ो....!
~भाई का छोटा भाई
छुपानी पड़ती है दिल की सच्चाई कभी कभी ,
बहुत बुरी लगती है ये अच्छाई कभी कभी ,
लोग पूछते हैं तू अपने बारे में कुछ बताता क्यों नहीं ,
सच सच अपनी जिंदगी को जताता क्यों नहीं ,
हर पल जख्म गम लिखता रहता है ,
तू दो पल हंस कर बिताता क्यों नहीं ,
सब के बारे में लिखता रहता है ,
तू अपने बारे में कब लिखेगा ,
जब दुनिया तुझे गलत समझ जाएगी ,
क्या तब तू सीखेगा ,
मैं गलत हूं कि सही मैं खुद ही खुद को परखूंगा ,
यह दुनिया है दोस्त भगवान को भी बुरा कहती है ,
अगर यह दुनिया एक दर्द सहती है ,
तो 1000 लफ्ज़ भगवान को गलत कहती है ,
खैर छोड़ो ये तो इंसान हैं ,
अब इंसानों में इंसानियत कहां रहती है ,
मुझे गलत समझने वाले समझ जाओ ,
तुम्हारी समझदारी ही इतनी है ,
मैं अपनी अच्छाई के बारे में क्या लिखूं ,
जितना तुम समझ गए मुझे ,
औकात ही तुम्हारी उतनी है,
खैर छोड़ो साहब ,
बहुत सारी बातें बता दिया ,
भाई का छोटा भाई अपने बारे में जता दिया ,
हर वक्त लिखता था अपनी जिंदगी का गम ,
आज इस कविता में खुद क…
जो मिला उसे गुजारा ना हुआ ।
जो हमारा था हमारा ना हुआ ।
हम किसी और से मनसुब हुए क्या ये नुकसान तुम्हारा ना हुआ,
खर्च होता रहा मोहबब्त में फिर भी इस दिल को खासारा ना हुआ,
दोनों एक दूसरे पे मरते रहे कोई अल्हा को प्यारा ना हुआ ।
बेतकल्लुफ़ भी वो हो सकते थे हमसे ही कोई इशारा ना हुआ.…....
❤️ शुभ रात्रि❤️

लिखता तो मैं खुद ही हूं ,
पर पढता कोई और है ,
तू तो अपना है दोस्त ,
मैं तुझे कब बोला कि तू गैर है ,
यह तू गैर गैर कहना छोड़ दे ,
अगर अपना नहीं समझता है ,
तो दोस्ती तोड़ दे ,
जब मुझे तू अपना समझता ही नहीं ,
तो फिर मुझे समझाने क्यों लगता है ,
मैं तुझे गैर बोलूं यह कभी हो सकता है ,
अब रहने दे भाई ज्यादा प्यार मत जता ,
तुम मुझसे गुस्सा क्यों हो सच सच यह बता ,
मतलब कि एक छोटी सी बात लेकर मुंह फुला लिया ,
छोटी सी बात के लिए भाई को भुला दिया ,
तू क्या कहता है,
ऐसी बात के लिए दोस्ती तोड़ दूं ,
तू कहे तो मैं दुनिया छोड़ दू ,
अब ज्यादा प्यार मत जता ,
मैं क्या बोला जो तुझे बुरा लगा ,
सच सच ये बता ,
मैं तो किसी को कोई बात भी नहीं बताई,
मैं क्या लिखूं दोस्त तेरे लिए,
मैं ही पागल भाई का छोटा भाई....✍️
~भाई का छोटा भाई
Your voice belongs here.
Share a thought, a poem or a story with the community.
Start writing ↗