कोई नेता से अभिनेता बन गया कोई अभिनेता से नेता जनता को कुछ नहीं देता जनता से ही सब कुछ लेता फ़कीर बादशाह साब ( FAKEERA)
मुझे डोज़ख़ से मत डराओ मेरे यारों मैंने दुनिया देखी है दुनिया से बड़े कोई दोज़ख़ कहीं हो ही नही सकती फ़कीर बादशाह साब (FAKEERA)
तू मुझे उड़ता हुआ परिंदा नजर आता है अंदर से तू मर चुका है बस ऊपर से ज़िंदा नज़र आता है फ़कीर बादशाह साब ( FAKEERA)
महनत से भी मिलेगा उतना ही नसीब में लिखा जितना है उंठ हाथी घोड़े डूब गए गधा पूछता है पानी कितना है फ़कीर बादशाह साब (FAKEERA)
फूलों से है वोह नाजुक पत्थर से है वोह सख़्त आदमी है मोंम के और अंगार है वक़्त फ़कीर बादशाह साब ( FAKEERA)
मै समझ गया के मै इस दुनिया में क्यों आया हूं मै अपने अज़ीज़ों के जनाज़ों को कांधा देने के लिए आया हूं फ़कीर बादशाह साब ( FAKEERA)
कुछ तूने दिए कुछ मैंने कमाए कुछ दुनिया ने मुझे बांटे है आय ज़िन्दगी तेरे दामन में सिर्फ कांटे ही कांटे है फ़कीर बादशाह साब (FAKEERA)
तेरा पंडित तेरा मुल्ला तेरा पादरी मुझे तेरे खौफ से डरता है अय ख़ुदा तेरा खौफ़नाक और डरावना चहेरा वोह मुझे दिखता है फ़कीर बादशाह साब ( FAKEERA)
सफर ज़िन्दगी का तन्हा तन्हा है चारों तरफ मेला ही मेला है इतनी सारी भीड़ मै भी इंसान अकेला अकेला है फ़कीर बादशाह साब (FAKEERA)
फ़कीर ज़िद पर आ जाए तो उखाड़ कर फेंक देता है तख्त शहंशाहों का फ़कीर बादशाह साब ( FAKEERA)
जितने भी हर्फ है सब से ज़्यादा तासीर अलिफ़ में है या अल्लाह तेरा नाम लेनेवाला हर एक बंदा तकलीफ में है फ़कीर बादशाह साब (FAKEERA)
क्या हासिल गर साब कुछ खोकर जंग जीतेगे ज़ख्म तो भर जायेगे मगर दाग नहीं मितेगे फ़कीर बादशाह साब (FAKEERA)
पल पल को बदलता है रंग गिरगिट की तरह वक़्त ये जिसके हाथों से निकल जाए फ़िर उसका ना ताज रहे ना तख्त ओ वक़्त हाय वक़्त तू कहां कहां पहोंच गया बे वक़्त फ़कीर बादशाह साब ( FAKEERA)
जिन कविता गीत ग़ज़ल शेर नज़्म दोहे वगैरा वगैरा का मतलब आम आदमी को समझाना पड़ जाए अय सी किताबों को फ़ाड़ कर कचरे के डिब्बों में फेक देना चाहिए फ़कीर बादशाह साब ( FAKEERA)
कबीरा गरीबन तक नहीं पहुंच पाए आप के विचार आप के दोहे बस अमीरन ही गाये अमीरन ही सुने अमीरन ही समझे आप के दोहे फ़कीर बादशाह साब ( FAKEERA)
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